Shdika

**जिसके सहारे हम राह ढ्ंढते थेवो खुद दुबका है कोहरे मे । **आधुनिक शिष्य)गुरू ने शिष्य से दक्षिणा में अंगूठा मांगा ।उस ने गुरू को ठेंगा दिखा दिया । ** (कुंभ कर्ण)यह दो दिन जागता है।एक १५अगस्त और२६जनवरी ।बाकी साल सोता है । **उनके भाषणो मे है कुर्सी की चिन्ता ,हमे है रोटी की फिक्र […]

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